Tuesday, December 7, 2010

Mumbai- A story by Neha verma

मेरा नाम नेहा है. मेरी उम्र २६ साल है. ये कहानी मेरी आप-बीती है. मैं दिल्ली से मुंबई चली गयी थी. मैं एक मॉडल हूँ और मुंबई में ज्यादा अवसर हैं. जाने से पहले मैंने सोचा था की मैं अपने आप को वहां सेट कर लुंगी लेकिन मुझे ये नहीं पता था की मुंबई में सेट करना कितना मुश्किल है. आज की भाग दौड़ की दुनिया में हर आदमी कमीना है. लेकिन मुझे भी अब इस दुनिया में अपना काम निकालना आ गया है.

मैं अगस्त के महीने में मुंबई पहुची. कुछ दिन एक सहेली के घर पे रुक गयी. १-२ जगह से कुछ मोड़ेल्लिंग का काम भी मिल गया था. एक बात मैं बताना चाहूंगी, मेरे बूब्स थोड़े बड़े , मोटे और गोल हैं. मैं कुछ भी पेहेंती हूँ तो वो मेरी छाती पे तिघ्त रहता है. इसी वजह से सड़क पे चलते हुवे या कहीं मोड़ेल्लिंग करते हुवे लोग मुझे घूरते रहते हैं. कभी कभी रात को सोते समय सोचती हूँ की अगर उन् सब मर्दों को मैं अपनी मर्ज़ी का करने दूं तो वो मेरा क्या हस्र करेंगे!! सबकी आँखों से ही हवस टपकता है!

मैं एक अपार्टमेन्ट लेने के लिए गयी हुई थी. प्रोपर्टी अगेंट एक ३०-३२ साल का आदमी था. उसने फ्लैट दिखाया और मुझे पसंद भी आया. वो भी मुझे बार बार घूर रहा था. फ्लैट का किराया उसने १२००० महिना बताया. ये मेरे लिए ज्यादा था. मैं ८०००-१०००० ही दे सकती थी. मैंने ये बात उसको बताई, तो उसने बोला - नेहा जी, किराया इतना कम करना मुश्किल है. १२ का ११ हो सकता है , लेकिन ८ हज़ार होना असंभव है. मैंने उसको थोडा आग्रह किया तो उसने बोला की वो मकानमालिक से बात करके मुझे बताएगा.

उस्सी दिन शाम को ६:३० बजे उसका फ़ोन आया. उसने बोला की उसकी बात हुई है, और मकानमालिक मुझसे मिलना चाहता है. मकान देने से पहले वो देखना चाहता है की किरायेदार कैसी है. उसने कहा की -- 'आप कल मेरे ऑफिस में आ जाईये, मकानमालिक भी यहीं आएंगे. यहीं किराए की भी बात हो जाएगी. उम्मीद है की १० हज़ार में बात बन जाए.'

मैं अगले दिन अगेंट के ऑफिस गयी. मैंने पतली साड़ी पहनी थी. अगेंट के ऑफिस में मकान मालिक पहले से ही पंहुचा हुआ था. वो एक ४० साल का थोडा मोटा मर्द था. उसकी मूंछे भी थी. मुझे देखते ही वो मुस्कुराया और उसकी नज़र भी मेरी छाती पे पड़ी. हमेशा की तरह मेरी blouse tight थी. और पतली साड़ी के आर पार मेरे बूब्स के बीच की धार दिख रही थी.

मैं बैठ गयी और हमारी बात शुरू हुई. बातों बातों में उन् दोनों को ये पता चल गया की मैं मुंबई में अकेली हूँ. और मैं मॉडल हूँ. दोनों आपस में एक दुसरे को देख के मुस्कुरा रहे थे. मकानमालिक ने कहा -- 'अकेले तो हम सभी हैं. आपको मुंबई में घबराने की कोई बात नहीं है. कभी कोई ज़रुरत पड़े तो मुझे बताईयेगा. आप बहुत खूबसूरत हैं और अछे घर से हैं इसलिए मैं आपको ये घर १० हज़ार में दे रहा हूँ. नहीं तो इस एरिया का रेट १२ के ऊपर ही है.'

मैं समझ गयी की उसके दिमाग पे हवस सवार है , नहीं तो वो मुझपे एहसान क्यों करता! मैंने भी इस मौके का फायदा उठाना चाहा. मैंने बोला की मुझे तो ये घर ८ हज़ार में चाहिए. 'शर्मा जी अब तो मैं आपके फ्लैट में रहूंगी, हमारी बात होती ही रहेगी. ये तो लम्बी जान पहचान है, आप मुझे ये घर ८००० में दे दीजिये.'

उसने बोला -- 'अरे नहीं, ८ तो बहुत कम है. इसमें तो मेरा कोई फायदा नहीं, उल्टा नुक्सान ही है.'

इतने में अगेंट बोल pada - 'अरे शर्मा जी, नेहा मैडम मॉडल हैं, इनसे जान पहचान बढ़ेगी तो फायदा ही फायदा है, नुक्सान कैसा.'

मकानमालिक जोर से हस पड़ा और फिर मेरे बूब्स को घूरने लगा. मुझे अब वहां अजीब लग रहा था. दोनों मर्दों की आँख से हवस दिख रही थी. अगेंट का ऑफिस बिलकुल बंद और air -conditiXd था. और उसके अन्दर मैं इन् दोनों के साथ फस गयी थी. मकान मालिक ने अपना एक हाथ मेरे घुटनों के पास रख के हल्का सा दबाया और बोला -- अब आप ही बताईये नेहा जी, मेरा क्या फायदा होगा?

इस से पहले की मैं कुछ बोलती अगेंट ने उठ के रूम की छिटकनी लगा दी, और मेरे पीछे आके खड़ा हो गया. फिर मुझे बोला -- नेहा जी, ये घर आपको ८ क्या, ७००० में मिल सकता है. अगर आप चाहें तो ....

मैंने बोला -- क्या मतलब?

अगेंट ने मेरे पीछे खड़े खड़े अपने दोनों हाथ मेरे कन्धों पे रख दिए और बोला -- बस हमारे साथ ठोस cooperate करिए..!
इधर मकान मालिक ने भी अपने हाथ मेरे घुटनों से सरका के ऊपर मेरी जाँघों पे रख दिए थे.

मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करून. मेरे मन में इन् दोनों के लिए बहुत घृणा आई. फिर अचानक लगा की थोड़ी देर की ही बात है, कहाँ १२००० का फ्लैट, कहाँ ७०००!! मैं इस्सी सोच में थी, अभी कुछ बोल नहीं पायी थी .

अगेंट ने धीरे से मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिया दिया. 'ओह सॉरी, नेहा जी' .. और पीछे खड़ा हो के मेरे बूब्स का नज़ारा लेने लगा. मकानमालिक मेरी जाँघों को हलके हलके दबा रहा था. दो मर्द मुझे एक साथ छू रहे थे, मैं तो अन्दर से काँप रही थी.

अचानक ही अगेंट ने मेरे दोनों बाह पकडे, और मकानमालिक ने मेरे दोनों पैर, और मुझे कुर्सी से उठा लिया. मैं हवा में थी और इन् दोनों ने मुझे उठाया हुवा था. फिर उन्होंने मुझे सोफे पे पटक दिया. सोफा बहुत बड़ा था, काले रंग का leather का सोफा. मकानमालिक फिर बोला, नेहा जी बस cooperate करो, मजे भी आपके, घर भी आपका. उसने मेरे दोनों बूब्स पकड़ लिए और उनको मसलने लगा . मैं चीख उठी ... उसका हाथ बहुत तगड़ा था.

अगेंट ने मेरी साड़ी उतारनी शुरू की और २ ही पल में मेरी साड़ी ज़मीन पे पड़ी थी. फिर दोनों ने मुझे उठ के खड़े होने के लिए कहा. मैं उठ गयी . वो दोनों सोफे पे बैठ गए . मुझे बोला की मैं अपना blouse और peticote उतारूं. मुझे बहुत शर्म आ रही थी .. दोनों ने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा हुआ था और उसको मसल रहे थे. मुझे समझ आ गया की अब यहाँ से भागने का कोई तरीका नहीं है. मैं उनकी बात मानती जाऊं तो ही मेरा कम से कम नुक्सान है.

मैंने अपने ब्लौसे के हूक खोले और उसको उतार के नीचे फेक दिया. दोनों की आँखे फटी रह गयी. मेरे बूब्स बहुत ही गोरे और मोटे हैं. और मैं जानती हूँ की ये किसी को भी पागल बना सकते हैं. फिर मैंने अपने peticote का नाडा खोला और वो नीचे ज़मीन पे गिर गया. मैं उन् दोनों हव्शी मर्दों के सामने अब सिर्फ ब्रा और panty में कड़ी थी. मेरा गोरा जिस्म देख के दोनों पागल हो चुके थे. दोनों ने pant की जिप खोल के अपना लंड बहार निकाल लिया था और उससे सहला रहे थे.

फिर मकानमालिक ने बोला -- नेहा जी अब और नहीं रुका जा रहा, ज़रा जन्नत के नज़ारे करवाओ, ये सब भी उतार फेको. मैंने अपना ब्रा खोल दिया. ब्रा के खोलते ही मेरे बूब्स उछल के सामने आ गए. बड़े बड़े गोरे tight बूब्स देख के दोनों के मुह में पानी आ गया. अगेंट मेरी तरफ लपका, लेकिन मकानमालिक ने उससे रोक दिया -- अभी रुक यार! नेहा जी अपनी panty भी उतारो. मैंने panty की दोनों साइड एलास्टिक में अपनी ऊँगली डाली और उसको नीचे सरका दिया.

मेरा पूरा नंगा जिस्म अब उन् दोनों के सामने था. लम्बा गोरा जिस्म, बड़े बड़े बूब्स, मस्त चिकनी छूट और मक्खन जैसी जांघें. मुझे देखने के लिए मेरे ऑफिस में लोग पागल रहते हैं. आज तक किसी को मेरा जिस्म नहीं मिला और यहाँ ये दोनों पूरी तरह उसका मज़ा ले रहे थे. मुझे शर्म भी आ रही थी और कहीं न कहीं एक गन्दा सा मज़ा भी आ रहा था.

मकानमालिक ने कहा -- तुझे घर चाहिए न सस्ते में, चल अब उलटी हो के झुक जा और अपनी गांड दिखा.

मैं दूसरी तरफ घूम के झुक गयी और दोनों हाथ से फैला के उन्हें अपनी गांड दिखा रही थी. फिर उनके कहने पे मैं दोनों हाथ और घुटनों के बल कड़ी हो गयी, किसी कुतिया की तरह. मुझे बहुत बुरा लगा ये, लेकिन वहां और कोई चारा नहीं था.

फिर मकानमालिक ने मुझे खीच के मेरे मुह में अपना लौड़ा ठूस दिया. मैं कुतिया की तरह झुकी हुई मकान मालिक का लौड़ा चूस रही थी. उधर अगेंट मेरे पीछे जा के मेरी गांड सहलाने लगा. मेरी गोरी चिकनी गांड देख के उस से रहा नहीं गया और उसने मेरी गांड में अपना मुह घुसा दिया और उससे चाटने लगा. मेरी गांड पे उसकी जीभ लगते ही कर्रेंट सा लग गया. मैं सिसकारी भर उठी .... aaaaaahhhhhh स्स्स्सस्स्स्स .....मकानमालिक ने बोला -- देख रे, मज़ा आ रहा है साली को.. और उसने मेरा सर पकड़ के वापस मेरे मुह में अपना लंड घुसा दिया.... मैं सिसकारी भर रही थी ..... aaaahhhhh स्स्स्सस्स्स्स गुलुप गुलुप म्मम्मम्म म्मम्मम्मम म्मम्मम्मम म्म्मम्म्म्मम्म

अब तक मेरी छूट भी एक दम गीली हो गयी थी और अगेंट पीछे से मुह घुसा के मेरी छूट का रस चाट रहा था. फिर वो उठा और उसने अपने लंड का सुपारा मेरी गांड के छेद पे टिका दिया. मैं एक दम से चीख उठी --- नहीं नहीं , मेरी गांड मत मारना, बहुत दर्द होगा , please नहीं ...... लेकिन उसने मेरी एक न सुनी और अपने लंड का धक्का मारा ....उसका लंड मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुस गया... aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मैं दर्द से काँप उठी और पूरी ताकत से चिल्ला उठी ... उसने फिर अपना लंड बहार निकला और फिर पूरा अन्दर घुसा दिया... मेरी गांड फट चुकी थी. वो मेरी चुत्तरों पे थप्पड़ मार रहा था और पागल कुत्ते की तरह मुझे चोदे जा रहा था. थोड़ी देर में उसकी स्पीड बढ़ गयी, उसने झुक के मेरे बूब्स दबाये और आधा किलो गरम वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया .... उसके गरम वीर्य से मुझे अच्छा लगा, थोडा दर्द भी कम हुआ. उसका शरीर थोडा ढीला हुआ और वो मेरे ऊपर से उठा.

मकानमालिक अभी भी मुझसे अपना लौड़ा चुसवा रहा था. वो अब उठा और मुझे भी उठाया. मेरे पैर काँप रहे थे. ये मैंने अपने साथ क्या कर लिया था!! उसने मुझे सोफे पे लिटा दिया और मेरे ऊपर छद गया. उसने मेरी दोनों जांघें फेला दी और मेरी चूत में अपनी जीभ घुसा दी! मैं पागल हो उठी. aaaaaaahhhhh स्स्स्स aaaahhhhhh .... aaahhhhh ... चोद डालो मुझे .. aaaaahhhhhhh .. चोदो शर्मा जी .....
वो उठा और बोला, ये लो नेहा जी, जैसी आपकी मर्ज़ी ... और इतना कहते ही उसने अपना कला मोटा ८ इंच का लौड़ा मेरी छूट में घुसेड दिया. मेरी छूट चरमरा उठी.... मैं कराह उठी ... aaaahhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhha aaahhhhhhh

वो स्पीड से धक्के मार रहा था. उसके धक्कों से मेरे बूब्स उछल रहे थे. अगेंट मेरे सर के पास आया और मेरे मुह में अपना लौड़ा डाल दिया. थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही उन् दोनों से चुदती रही.

थोड़ी देर के बाद अगेंट फिर से झड़ने वाला था. उसने मेरे मुह से अपना लौड़ा निकला और मेरे मुह के ऊपर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में उसका गाढ़ा वीर्य बहार आया और मेरे पूरे चेहरे पे फ़ैल गया. मैंने अपनी आखे और मुह बंद कर लिया था. लेकिन उसने ज़बरदस्ती मेरा मुह खुलवा दिया और अपने लौड़े से वो वीर्य मेरे मुह में डाल दिया. अजीब सा लिस-लिस्सा सा नमकीन सा स्वाद था. मजबूरी में मुझे वो घोटना पड़ा.

उधर मकानमालिक अभी भी मुझे पागल कुत्तों की तरह चोद रहा था. मेरी चूत फ़ैल गयी थी , उस से रस निकाल रहा था. वो फूल गयी थी. मेरी गांड में अभी भी दर्द था एंड अगेंट का वीर्य भरा हुआ था . मैंने चारों तरफ देखा ... बंद कमरा और मेरे ऊपर पसीने से लथपथ दो हव्शी चढ़े हुवे थे.

मुझे मज़ा भी आ रहा था अब. मैं एक रंडी की तरह दो मर्दों से चुदने का मज़ा ले रही थी. चोदो और चोदो मुझे ... आआह्ह्ह्ह ... स्स्स्स... और जोर से .... आआअह्ह्ह्ह .... मैंने अपने नाख़ून सोफे में घुसा दिए थे .... मेरी चूत में पानी भर गया था और छाप छप की आवाज़ आ रही थी. मकानमालिक ने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया. मैं भी कराह उठी ..... वो १०-१५ सेकंड तक झाड़ता ही रहा ... उसने मेरी जाँघों पे दांत भी काट लिया ...

फिर वो दोनों उठे और मेरी तरफ देखा ... मैं सर से पैर तक, आगे पीछे वीर्य से ढकी हुई थी ... मैंने बोला -- तुम दोनों ने मुझे वीर्य से नेहला दिया है. हव्शी कुत्ते हो दोनों.
ये सुन के दोनों हस परे. अगेंट बोला -- मज़ा तो तुझे भी बहुत आया न साली!

२ घंटे की इस रास लीला के बाद उन् दोनों ने मुझे छोड़ा. फिर मुझे बाथरूम में जा के तैयार होने के लिए बोला. जब मैं बाथरूम में गयी तो वो दोनों भी आ गए. अगेंट ने बोला -- हमारे सामने अपनी सफाई करो नेहा जी. हम भी देखे ऐसी जन्नत जिस्म वाली गोरियां क्या करती हैं बाथरूम में!

दोनों हाथ से अपने लुंड को रगड़ रहे थे. मकानमालिक ने बोला -- नेहा जी , एक बार हमारे सामने मूत के दिखाओ. मुझे उस दरिन्दे से अब डर लग रहा था. मैं नीचे बैठ गयी और मूतने लगी... मेरी चूत चुद चुद के फूल गयी थी .... उसमें से जैसे ही मेरी धार निकली तो छुर्र्र चुर्र्र की आवाज़ आने लगी ..... उन् दोनों को ये देख के बहुत मज़ा आया ....

वो दोनों बहुत जोर जोर से मुठ मार रहे थे .... अगेंट मेरे पास आया और मेरे बूब्स पे अपना वीर्य झाड़ने लगा. उसके बाद मकानमालिक आया और उसने मेरे बालों पे अपना वीर्य झाड दिया. मैं बाथरूम में साफ़ होने आई थी लेकिन और गन्दी हो गयी.

दोनों मेरे पास ही खड़े थे, और मेरे ऊपर अपना वीर्य टपका रहे थे. अचानक से मैंने कुछ और गरम सा महसूस किया. नज़र ऊपर करके देखा तो मकानमालिक मेरे ऊपर पिशाब कर रहा था. मैं घृणा से छात्पता उठी, और उठ के हटने लगी. लेकिन मकानमालिक ने मुझे सर पकड़ के नीचे दबा दिया और बैठे रहने को बोला. १ मिनट तक उसने २ लीटर पिशाब मेरे ऊपर किया. मैं बस चुप चाप एक दासी की तरह बैठ के वो गरम-स्नान लेती रही. उसके बाद अगेंट आया और उसने मुझसे बोला की मैं दोनों हाथ से पकड़ के अपने बूब्स को ऊपर उच्काऊँ. मैंने ऐसा ही किया. फिर वो भी मेरे ऊपर पिशाब करने लगा. उसने अपनी धार मेरे बूब्स पे निशाना कर दी. मैं अपने ही हाथों से पकड़ के अपने बूब्स को अगेंट के पिशाब में नेहला रही थी.

ये सब ख़तम करके दोनों बहार चले गए. जाते जाते बोला, नेहा जी आपने बहुत खुश किया हमें. हम भी आपको खुश करेंगे.

जब मैं ठीक ठाक हो के वापस आई तो उन्होंने मुझे फ्लैट के कागजात दिए. उन्होंने मुझे वो फ्लैट ६५०० में ही दे दिया था.
मैंने बहुत खुश हुई, और सोचा की मेरा क्या गया, आधे दाम पे घर मिल गया, और मजे भी मिले. इसके बारे में किसको पता चलेगा! यही सब सोचते हुवे मैं वहां से चली गयी और समझ गयी की मुंबई में अकेली रह के कैसे काम निकलवाना है!!

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